Gita Diwas 2025 इस वर्ष 1 दिसंबर को मनाया जाएगा। यह वह महान तिथि है जब श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में अमर ज्ञान प्रदान किया था। इस लेख में Gita Diwas का महत्व, पूजा विधि, क्या करें–क्या न करें, आधुनिक जीवन में इसकी प्रासंगिकता और मोक्षदा एकादशी की जानकारी दी गई है
🌅 परिचय (Introduction)
क्या आपने कभी गीता के शब्दों में जीवन की दिशा अनुभव किया है?
Gita Diwas पर हम जानेंगे उस दिव्य ग्रंथ के महत्व को जो हर युग में सत्य और धर्म का मार्गदर्शन करता आया है।
📘 मुख्य विषय की जानकारी (Main Details)
Gita Diwas हर वर्ष मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी, जिसे मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है, को मनाया जाता है — यह वही दिन है जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने प्रिय सखा व भक्त अर्जुन को धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में दिव्य ज्ञान दिया था, जिसे हम भगवद गीता के नाम से जानते हैं। वर्ष 2025 में यह 1 दिसंबर को मनाया जाएगा। आज वह क्षेत्र हरयाणा राज्य में ज्योतिसर नामक तीर्थ से विख्यात है।
इस पावन तिथि पर विभिन्न मंदिरों, मठों में गीता पाठ, प्रवचन, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा का आयोजन होता है।
कुछ संप्रदाय के अनुयाई भगवद गीता की प्रतियों का वितरण भी करते हैं।
इस दिन श्री कृष्ण की आरती व दीप दान कर, गीता के कुछ श्लोकों का अध्ययन करना उत्तम माना जाता है।
यह दिन एकादशी भी है अतः कई भक्त व्रत भी रखते हैं और गीता के 18 अध्यायों के श्लोकों का पाठ भी करते हैं तथा गीता के माहात्म्य का प्रचार भी करते हैं।
यह दिन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, किन्तु आत्ममंथन और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर भी है।
जिन लोगों ने कभी गीता नहीं पढ़ी है, यह अत्यंत पावन दिन है जब भगवान के द्वारा दिये गूढ़ मंत्रों को पढ़ने और समझने का संकल्प ले सकते हैं।
हम अर्जुन भाव से कृष्ण के श्री चरणों में आश्रय लेकर भगवद गीता के गूढ़ संदेश को समझें तो अत्यंत श्रेष्ठ होगा।
🕉 पृष्ठभूमि या महत्व (Background or Significance)
गीता को केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन का पथप्रदर्शक माना गया है।
आज से लगभग ५००० वर्ष पूर्व जब कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध की ठहर ही गयी थी, तब अर्जुन कुरुक्षेत्र में धर्मयुद्ध के आरंभ होने के पूर्व, अपने सगे संबंधियों को शत्रुओं की सेना में देखे, तो विषाद योग में डूब गए थे।
वे धर्मसंकट में पड़कर अपने क्षत्रिय धर्म को भूल गए थे।
तब भगवान श्रीकृष्ण जो की उनके सारथी बने थे, ने उन्हें ज्ञान, कर्म, वैराग्य, भक्ति एवं आत्मा के अमर स्वरूप का ज्ञान दिया।
जिससे अर्जुन का विषाद योग दूर हुआ और मोह माया पर विजय प्राप्त किए।
प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी धर्मसंकट की स्थिति का सामना करता ही है।
ऐसे में भगवद गीता जैसे ज्ञान का आश्रय लेकर व्यक्ति उस धर्मसंकट को पार करने का विवेक प्राप्त करता है।
भगवद गीता के दिव्य ज्ञान को समझ कर व्यक्ति इस संसार में रहकर भी संसार से पृथक रहना सीख जाता है।
व्यक्ति, माया के प्रभाव को जानकार; जन्म मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर भगवान श्रीकृष्ण के चरण कमलों में आश्रय लेना ही अंतिम लक्ष्य है, यह समझ जाता है।
Gita Diwas हमारी उस विरासत का स्मरण करवाता है जो आत्मबोध, निष्काम कर्म और जीवन की गूढ़ताओं को सरल भाषा में समझाती है।
माना जाता है कि यही उपदेश आज भी हमें मानसिक शांति और सच्चे कर्तव्य की ओर अग्रसर करता है।
🌍 आज के सन्दर्भ में प्रभाव (Modern Relevance or Impact)
आज के भागदौड़ और तनावभरे जीवन में गीता का महत्व पहले से कहीं अधिक हो गया है।
भगवद गीता से हमें यह जानने को मिलता है की हमें अपने निर्धारित कर्तव्यों से विम्मुख नहीं होना है,
और अपने कर्म-फल से आसक्त नहीं होकर,
वरन, उसे भगवान को समर्पित कर देना चाहिए।
यही वास्तव में कर्मयोग है।
योग अर्थार्थ स्वयं को प्रत्येक क्षण भगवान का आश्रय में रहना।
जब मन विचलित हो, जब निर्णय लेना कठिन हो जाए,
तब गीता का एक श्लोक भी जीवन को दिशा दे सकता है।
क्या आपने कभी कठिन समय में “योगः कर्मसु कौशलम्” का भाव महसूस किया है?
Gita Diwas 2025 का उद्देश्य आधुनिक व्यक्ति को भी यह स्मरण कराता है कि ज्ञान, संयम और समर्पण ही सच्चे धर्म का मार्ग है।
✔ क्या करें और क्या न करें (Tips / Do’s & Don’ts)
✅ What To Do (क्या करें):
- प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
- भगवद गीता के श्लोकों का पाठ करें, विशेषतः 2, 4 और 18वां अध्याय।
- घर या मंदिर में दीप प्रज्वलित करें और श्रीकृष्ण की पूजा करें।
- व्रत रखने का संकल्प लें और सात्विक आहार लें।
- समाज में गीता ज्ञान का प्रचार करें, बच्चों को श्रवण करवाएं।
❌ What Not To Do (क्या न करें):
- क्रोध, द्वेष या छलपूर्ण व्यवहार इस दिन न करें।
- मांस-मदिरा का सेवन इस दिन पूर्णतः वर्जित है।
- गीता पाठ को केवल औपचारिकता मानकर न करें, भाव से जुड़ें।
💛 भक्तों / पाठकों के लिए संदेश (Message or Reflection)
Gita Diwas केवल एक तिथि नहीं, एक आत्मिक पुकार है —
चलो, जीवन को समझने की ओर कदम बढ़ाएं।
जब जीवन किसी मोड़ पर ठहरता है या संघर्षों से उलझ जाता है,
तब गीता का ज्ञान दीपक बनता है।
आज के दिन आप गीता को केवल पढ़ें नहीं,
उसके माध्यम से स्वयं को पहचानें।
क्या आपने कभी सोचा है कि संभवतः आपकी समस्या का समाधान गीता के किसी एक श्लोक में छिपा हो?
“जहाँ धर्म है, वहाँ जीत है” — और गीता धर्म का सार है।
🌼 मोक्षदा एकादशी व्रत संबंधी जानकारी
- मोक्षदा एकादशी का व्रत इस वर्ष 1-दिसम्बर प्रातः 6:00 बजे प्रारम्भ होगा।
- पारण: 2-दिसम्बर प्रातः 6:01 से सुबह 9:37 के बीच।
- निर्जला/अन्न रहित अनुमति प्राप्त खाद्य सामाग्री जैसे – फल, साबुदाना, दूध दही, आलू, कद्दू, शकरकंद, खीरा आदि का सेवन भगवान को भोग लगाकर कर सकते हैं।
- विशेष संप्रदाय से जुड़े लोग अपने गुरु या वरिष्ठ से परामर्श अनुसार ही भोजन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Gita Diwas 2025 कब मनाया जाएगा?
Gita Diwas 2025 20 दिसंबर को मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन पूरे भारत में श्रद्धा और भक्ति से मनाया जाएगा।
क्या Gita Diwas पर व्रत रखना आवश्यक है?
यह व्यक्तिगत श्रद्धा पर निर्भर करता है।
कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं, अन्य केवल गीता पाठ और पूजा कर कर्मयोग के सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
इस दिन कौन-से अध्याय अधिक पढ़े जाते हैं?
विशेष रूप से गीता का द्वितीय (सांख्य योग),
चतुर्थ (ज्ञान योग)
और अठारहवाँ (मोक्ष संन्यास योग) अध्याय प्रमुख हैं।
🕊 निष्कर्ष (Conclusion)
Gita Diwas 2025 हमें यह अवसर देता है कि
हम श्रीकृष्ण के संदेशों को केवल पढ़ें नहीं,
बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारें।
जीवन का संघर्ष कितना भी बड़ा हो,
भगवान श्रीकृष्ण का उपदेश हमेशा मार्गदर्शन करता है।
“जहाँ विश्वास है, वहाँ ईश्वर हैं।”
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। यह लेख ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं, धर्मग्रंथों, प्रवचनों और दंतकथाओं के आधार पर लिखा गया है। इसे अंतिम सत्य या दावा न मानें। अपने विवेक का उपयोग करें। यह ब्लॉग अंधविश्वास का समर्थन नहीं करता।




